तेरी खुशबू नही मिलती तेरा चेहरा नही मिलता
हमें तो शहर में कोई तेरे जैसा नही मिलता
ये कैसी धुंद में हम सफर का आगाज़ बैठे
तुम्हे आँखे नही मिलती हमें चेहरा नही milta
कर एक तदबीर अपनी राएगा ठहरी मुहब्बत
kisi भी ख्याब को ताबीर का रास्ता नही मिलाता
ज़माने को करीने से वो अपने साथ रखता है
मगर मेरे लिए उसको कोई लम्हा नही मिलता
मुसफत में दुआ-ऐ-अब्र उन का साथ देती है
जिन्हें सहरा के दमन में कोई दरिया नही मिलता
जहाँ ज़ुल्मत रगों में अपने पंजे gaarh देती है
उसे तरीक रास्तो पे दिया जलता नही milta
बहुत खूब
ReplyDeleteज़माने को करीने से वो अपने साथ रखता है
मगर मेरे लिए उसको कोई लम्हा नही मिलता
मुसफत में दुआ-ऐ-अब्र उन का साथ देती है
जिन्हें सहरा के दमन में कोई दरिया नही मिलता
ये शेर ख़ास पसंद आया
वीनस केसरी
thank u bro
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