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Friday, June 12, 2009

कोई बहुत रोया

एक लफ्ज़ तसल्ली का ; एक लफ्ज़ मोहब्बत का
ख़ुद अपने लिए उसने लिखा तो बहुत रोया
पहले भी शिकस्तों से खायी थी शिकस्त उसने
लेकिन वो तेरे हाथो हारा तो बहुत रोया
इतना आसान न था हस्ती से गुज़र जाना
उतरा जो समंदर में तो दरिया बहुत रोया
जो शख्स न रोया कभी तपती हुई राहों में
दिवार के साये में बैठा तो बहुत रोया

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