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Tuesday, June 2, 2009

कोई लम्हा भी कभी लौट कर नही आया
वो शख्स ऐसा गया फ़िर नही आया

वफ़ा के दस्त में रास्ता नही मिला कोई
सिवाए गर्द-ऐ-सफर हमसफ़र नही मिला

किसी चिराग ने नही पूछी ख़बर मेरी
कोई भी फूल मेरे नाम पर नही आया

पलट के आने लगे शाम को परिंदे भी
हमारा सुबह का भूला मगर नही आया

कैसे यकीन करे " अमजद " वो वादा ख़िलाफ़
ये उम्र कैसे कटेगी अगर नही आया

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