कोई लम्हा भी कभी लौट कर नही आया
वो शख्स ऐसा गया फ़िर नही आया
वफ़ा के दस्त में रास्ता नही मिला कोई
सिवाए गर्द-ऐ-सफर हमसफ़र नही मिला
किसी चिराग ने नही पूछी ख़बर मेरी
कोई भी फूल मेरे नाम पर नही आया
पलट के आने लगे शाम को परिंदे भी
हमारा सुबह का भूला मगर नही आया
कैसे यकीन करे " अमजद " वो वादा ख़िलाफ़
ये उम्र कैसे कटेगी अगर नही आया
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