Pages

Monday, October 18, 2010

अपने जज़्बात आंख में रख लो Bas
यही बात आंख में रख लो

ज़िन्दगी तो सफ़र है सेहरा का
थोड़ी बरसात आंख में रख लो

दिन से जानां कभी छुपा के मुझे
सिर्फ इक रात आंख में रख लो

मैं हूँ महवर तुम्हारी चाहत का
तुम मेरी ज़ात आंख में रख लो

No comments:

Post a Comment